नारी “ समाज की नीव ”

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भारत में हर तरफ देखो तो नारी और पुरुष साथ कदम से कदम मिला के चल रहे है, नारी को उसका पूरा अधिकार  है कि वो अपने अनुसार जीवन यापन करे, नारी को आज कोई बोझ नहीं समझ रहा, नारी को पुरुष की तरह शिक्षा के, राजनीति के, खेलकुद के, आदि छेत्र में अपनी प्रतिभा दर्शने का पूर्ण अधिकार है, नारी को देवी के रूप  में पूजा जा रहा  है, नारी को अपने अधिकार के लिए दर दर की ठोकरे नहीं खानी पड़ रही, समाज में नारी के प्रति हर किसी की नज़र में सम्मान है और नारी की सुरक्षा करना हर कोई अपना करर्तव्य समझ रहा है।

 जी हाँ यह कोई सपना नहीं है, यह मेरा आज का भारत है।

आज भारत में नारी का जो सम्मान है वो हमारे देश के महान व्यक्तियों जैसे – राजा राम मोहन रॉय, ज्योतिराव गोविन्दराओ फुले, महात्मा गांधी, आदि का एक सपना था लेकिन आज वो सपना पूरा होता दिख रहा है, जिस तरह आज की नारी अपने हक़ के लिए पीछे नहीं हट ती, और समाज में अपने सम्मान और अपने वर्चस्व के लिए पुरजोर मेहनत कर रही है, उस से लग रहा है आने वाला भारत नारी के लिए स्वर्णिम कल होगा।

नारी के उत्थान  के लिए भारत सरकार भी समय समय पर नई-नई नीतियाँ लाती रहती है जिस से देश की नारी को किसी भी क्षेत्र में अपना व्यवसाय बनाए, चाहे वो क्षेत्र शिक्षा का हो, व्यापार का हो, खेल कूद का हो, कलाकारी का हो, राजनीति का हो, आदि। आज आप भारत के इतिहास के 100 साल भी पीछे जाए या आज के भारत को देखे आपको कई ऐसी महिलाओं के नाम अलग-अलग क्षेत्र से मिलेंगे जिन्होने अपनी मेहनत से देश का नाम तो ऊंचा किया ही साथ ही देश की दूसरों महिलाओं को प्रोत्साहित भी किया, जैसे – शिक्षा के क्षेत्र में सावित्रीबाई फुले, डॉ॰ असीमा चैटर्जी, आदि। राजनीति के छेत्र में इन्दिरा गांधी, विजया लक्ष्मी पंडित, कमलादेवी चट्टोपाध्याय, आदि। इसी तरह हर क्षेत्र में नारी काफी समय से भारत की प्रगति में अपना योगदान देती आ रही है और शोभायमान  समाज का निर्माण कर रही है।

अमेर्लिया ईरहार्ट नी भी क्या खूब कहा है –

“महिलाओ को पुरुषों की तरह, असंभव  कार्य करने को कोशिश  करनी चाहिए , और जब यह असफल हो, उनकी असफलता दूसरों के लिए एक चुनौती होनी चाहिए”

8 मार्च, जो की महिला दिवस के रूप  में मनाया जाता है, लेकिन भारत में अब हर दिन महिला दिवस होता है,महिलाओं की रक्षा, उनका सम्मान और उनको किसी भी कार्य के लिए प्रोत्साहित करने का काम भारत में रोज़ होता है, और मेरा मानना है की अगर महिलाएं  इसी तरह अपना मनोबल बड़ाए रखे, अपने हक़ के लिए लड़ने  का दिल में जज़्बा रखें तो वह अपने कल को और भी सुनहेरा बना सकती हैं और इसी के साथ वो संसार की हर नारी को उनके सशक्तिकरण के लिए उन्हें प्रेरित कर सकती है,जिस से यह पूरा संसार एक सुनहेरे कल की और अग्रसर होगा।

जिस तरह किसी  भी किले को मजबूती से खड़ा रखने के लिए और सालों साल उसका ढांचा बरकरार बनाए रखने के लिए उसकी नीव बहुत अहम भूमिका निभाती है उसी  तरह किसी भी देश के समाज को मजबूती से खड़ा करने और सालों साल उसका ढ़ाचा  बरकरार बनाए रखने के लिए नारी की भूमिका नीव का काम करती है।

नारी मजबूरी नहीं, ज़िम्मेदारी है

नारी हारी नहीं, आज भी शक्तिशाली है।

मयंक माहेश्वरी

(ब्लॉग एडिटर)

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